27 जून 2016

पैन्ट और पाजामे कि मोरी चड़ाकर नमाज़ पढ़ना कैसा है

पैन्ट और पाजामे कि मोरी  चड़ाकर नमाज़ पढ़ना  कैसा  है

पैन्ट और पाजामे कि मोरी  चड़ाकर नमाज़ पढ़ना  कैसा  है |


कुछ लोग टखनो  से नीचा  लटका  हुआ पाजामा और पैन्ट पहनते  है अगर  उन्होने  इसकी आदत डाल रखी है और तकब्बुर व घमन्ड के तौर पर वह एेसा  करते है तो यह नाजाइज़ व  गुनाह  है


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 ° बगैर रुमाली के पाज़ामें या जांघिये को को पहन कर नमाज़ पड़ना
° अच्छी बाते अमल करो
° गेैर ज़रूरी जाहिलाना सवालात
° ग़ैर मुस्लिमो से गोश्त मँगाने का मसअला


और इस तरह  नमाज़  मकरुह  है
लेकिन अगर इत्तिफाक से हो  या बेख्याली  और बेतवज्जोही से हो तो हर्ज  नही और जो लोग इससे  बचने के लिए और टखने खोलने  के लिए मोरी पायेचे  को चढ़ाते है

वह गुनाह को घटाते  नहीं बल्कि बढ़ाते है और नमाज़ में  खराबी  को कम नहीं करते बल्कि  ज्यादा  करते  है  यह पैन्ट और  पाजामे की मोरी  पायेचे  को लपेटकर चढ़ाना नमाज़ में मकरूहे तहरीमी  है

हदीस में है  रसूलुल्लाह सल्लाहु तआला अलेहि वसल्लम  ने फरामाया कि मुझे हुक्म दिया गया कि  में सात हड़ियो पर सज्दा करूँ पेशानी दोनो हाथ दोनो घुटने और दोनो पंजे  और यह  हुक्म दिया गया कि में नमाज़ में कपड़े  और बाल न समेटूँ

( बुखारी  मुस्लिम  मिश्कात सफा - 83 )


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 ° Namaz Ke MasaiL
° Ramzano ke MasaiL
° Nikah Ke Masail
° Auraton Ke MasaiL


इस  हदीस की  रोशनी में कपड़ा  समेटना और चढ़ाना नमाज में मना है  लिहाजा पैन्ट और पाजामे की मोरी लपेटने और चढ़ाने वालो को इस हदीस से इबरत हासिल करना चाहिए

लेकिन इस्लाह  करने वालो  से भी गुजारीश है की नमाज़ में इस किस्म  की कोताहियाँ बरतने वालो को नरमी और प्यार मुहब्बत से समझाये  मान जाये ठीक वरना  उन्हे  उनके हाल पर रहने दे और मुनसिब  तरीके से इस्लाह  करे  उनको डाँटना झिड़कना और उनसे लड़ाई झगड़ा करना बहुत बुरा है ज़िसका नतीजा यह भी हो सकता है

की वह मस्ज़िद में आना और नमाज़ पढ़ना छोड़ दे  ज़िसका वबाल  उन झिड़कने वालो पर है क्यूकि इस में भी कोई श़क नहीं कि बाज इस किस्म कि खामिये के साथ नमाज़ पढने वाले बेनमजियो  से हाजारो दर्जा  बेहतर है और नमाज में कोताहियाँ करने वालो को चाहिए अगर कोई उनकी  इस्लाह करे तो बुरा मानने को बजाय उसकी  बात पर अमल करे



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 ° Magrib-Aur-Ishaa-ki-Namaz-Ka-Time Kabtak
° Namaz me Takbir Khade Hokar Sunna Kaisa
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इस पर गुस्सा न करे क्यूकि वह जो कुछ कह रहा
 है आपकी भलाई के लिए कह रहा है अगर वह कुछ सख्ती   से भी कह रहा है तो उसका
यह अमल
आपकी इसलाह ही है आपका काम तो हक  को सूनकर अमल करना है झगड़ा करना नहीं  है
अल्लाह हम सभी को अमल की तौफीक दे
आमीन


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