कुछ जरूरी मसाईल

कुछ जरूरी मसाईल



कुछ जरूरी मसाईल


* महफिल को हंसाना या यार दोस्तों के साथ हंसी मज़ाक करना जायज़ है मगर झूट या बेहूदगी नहीं होनी चाहिए

* बाज़ लोग याददाश्त के लिए कमरबंद या रूमाल वग़ैरह पर गिरह लगा देते हैं ये जायज़ है और इसी नियत से उंगलियों पर डोरा बांधना भी जायज़ है हां बिला वजह बांधना मकरूह है

* ऐसा बिछौना या तकिया या दस्तर ख्वान जिस पर कुछ लिखा हो इस्तेमाल करना नाजायज़ है

* मुशरेकीन के बर्तनों में कुछ भी खाना पीना मकरूह है जब तक कि उसे धो ना लें ये तब है जबकि उसका नापाक होना मालूम ना हो वरना अगर यक़ीनी है तो ऐसे बर्तनों में खाना पीना हराम है

* फर्जी यानि झूठे किस्से कहानियां पढ़ना या सुनना जायज़ है

* लोगों के साथ इखलाक़,नर्मी से पेश आना मुस्तहब यानि अच्छा है मगर बदमज़हब से बात करने में इतना लिहाज़ रखें कि उसे यक़ीन रहे कि इसे मेरा मज़हब पसंद नहीं

* किराए पर मकान दिया और खुद मकान देखना चाहता है तो किरायेदार से इजाज़त लेकर जा सकता है बग़ैर इजाज़त नहीं,कि मकान इसका है मगर सुकूनत उसकी

* किसी भी जानवर या कीड़े मकोड़ों को ज़िन्दा आग में डालना मकरूह है

* अगर जान माल इज़्ज़त आबरू का खतरा है या किसी पर अपना हक़ आता है और वो नहीं देता तो ऐसी हालत में किसी को रिश्वत देता है कि मेरा हक़ वुसूल हो जाए या मैं हिफाज़त से रहूं तो ये देना जायज़ है हालांकि लेने वाले को हरगिज़ जायज़ नहीं होगा

* बेटा अपने बाप का नाम लेकर या बीवी अपने शौहर को नाम लेकर पुकारे मकरूह है

* दुनियावी तक़लीफ की वजह से मरने की आरज़ू करना मकरूह है मगर गुनाहगार होने की वजह से मरना चाहता है ऐसी आरज़ू मकरूह नहीं

* काफिर के लिए मग़फिरत की दुआ करना जायज़ नहीं हां किसी ज़िन्दा के लिए हिदायत की दुआ कर सकता है

* हर महीने की 3,13,23 या 8,18,28 को निकाह के लिए मन्हूस जानना या किसी महीने को बुरा जानना जिहालत है,इस्लाम में इसकी कोई अस्ल नहीं

* इमामा शरीफ खड़े होकर बांधना और पैजामा बैठकर पहनना है,जो इसका उल्टा करेगा वो ऐसे मर्ज़ में मुब्तेला होगा जिसकी दवा डाक्टरों के पास भी नहीं होगी यानि ला इलाज मर्ज़

📕 बहारे शरियत,हिस्सा 16,सफह 132,252-259

शियाओं ने अहले बैत व मौला अली की शान में 3 लाख के करीब फर्जी हदीसे गढ़ी हैं

📕 क्या आप जानते हैं,सफह 297

बैतुल मुक़द्दस की ज़मीन आसमान से सबसे ज्यादा क़रीब है क्योंकि हर जगह से ये ज़मीन 18 मील ऊंची है

📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 4,सफह 687

बुर्राक़ बर्क़ से बना है यानि बिजली,बर्क़ 1 सेकंड में 299337 किलोमीटर का सफर तय करती है

📕 क्या आप जानते हैं,सफह 27

शराब पीते,ज़िना करते,चोरी करते जुआ खेलते या किसी भी हराम काम करते वक़्त बिस्मिल्लाह पढ़ना हराम है,और अगर जाएज़ समझे जब तो काफिर है

📕 फतावा आलमगीरी,जिल्द 2,सफह 286

जो रोज़ाना खाना खाने से पहले फातिहा दे ले तो कभी उस घर में रिज़्क की तंगी व बे बरकती नहीं होगी

📕 जायल हक़,जिल्द 1,सफह 253

दोज़ख में अज़ाब के 19 फरिश्ते हैं,हर 1 का क़द 100 साल की राह जितना है,उनकी 1 ज़र्ब से 7 लाख आदमी रेज़ा रेज़ा हो जाते हैं

📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 44

पहले खाना नहीं सड़ता था,बनी इसराईल को हुक्म था कि 'मन्न व सलवा' दूसरे दिन के लिए बचा कर ना रखें पर वो नहीं माने,उनकी नाफरमानी की वजह से खाना खराब होना शुरू हुआ

📕 रूहुल बयान,जिल्द 1,सफह 97

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