13 अग॰ 2019

मेहमान नवाज़ी सुन्नत है


मेहमान नवाज़ी सुन्नत है हज़रात इब्राहीम अलैहिस्सलाम की

 मेहमान नवाज़ी सुन्नत है


"मेहमान नवाज़ी हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की सुन्नत है
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आप बग़ैर मेहमान के कभी खाना तनावुल नहीं फरमाते थे
यहां तक कि अगर कभी कोई ना मिलता तो आप किसी की तलाश में एक दो मील तक सफर कर आते थे कि कोई मिल जाए जिसके साथ आप खाना खायें,मेहमान का आना रहमते खुदावन्दी का आना है और वो अपना रिज़्क़ खुद लेकर आता है इसलिए मेहमान के आने पर खुशी का इज़हार करना चाहिये मेहमान के आने पर नाखुश होना या उसको हिकारत से देखना तंगी और मुफलिसी का बाइस है,चंद हदीसे पाक मुलाहज़ा फरमायें|

❤ हदीस शरीफ ❤

➤जिस घर में लोगों को खाना खिलाया जाता है भलाई उसकी तरफ कोहान की तरफ जाने वाली छुरी से भी तेज़ दौड़ती है|
📕 इब्ने माजा,सफह 204

➤अपने मेहमान की ताज़ीम करो|
📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 50

➤लोगों ने अर्ज़ किया कि या रसूल अल्लाह सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम हम खाते हैं मगर हमारा पेट नहीं भरता तो आप सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि शायद तुम लोग अलग अलग खाते हो अर्ज़ की हां तो फरमाया कि इकठ्ठा खाया करो और बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़कर शुरू करो|

📕 इब्ने माजा,सफह 236

❤ फुक़्हा ❤

➤उस शख्स में कोई भलाई नहीं जो मेहमान नवाज़ नहीं और जिसके घर मेहमान नहीं आते उसके घर रहमत के फरिश्ते भी नहीं आते|

📕 अहयाउल उलूम,जिल्द 2,सफह 12

➤ मेहमान अपना रिज़्क़ लेकर आता है और घर वालों के गुनाह मिटाकर जाता है|

📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 9,सफह 176

➤ बन्दा जो कुछ खुद खाता है या अपने मां-बाप या अहलो अयाल पर खर्च करेगा उसका हिसाब क़यामत के दिन देना होगा मगर जो कुछ अपने दोस्तों पर खर्च करेगा उसका हिसाब नहीं होगा इसलिए मेहमान नवाज़ी बुज़ुर्गाने दीन की खास खसलत रही है|

📕 अहयाउल उलूम,जिल्द 2,सफह 9
📕 कीमियाये सआदत,सफह 245

➤ भूख से कम खाना सुन्नत है और पेट भरकर खा लेना मुबाह यानि जायज़ है मगर भूख से ज़्यादा खा लेना कि मेदा या हाज़मा खराब हो जाये हराम है मगर मेहमान का साथ देने के लिए ज़्यादा खा लेने की इजाज़त है|

📕 दुर्रे मुख़्तार,जिल्द 5,सफह 235
📕 फिक़्ही पहेलियां,सफह 247

➤ जब मेहमान आये तो उसकी ताज़ीम करो और उसे खिलाओ पिलाओ कि ऐसा करने से मौला तआला मेज़बान को जहन्नम से 7 खन्दक़ दूर कर देगा और हर खन्दक़ के दर्मियान 500 साल की मुसाफत होगी|

📕 अहयाउल उलूम,जिल्द 2,सफह 9

अब मेहमान कौन है,कब तक है,क्या खिलाया पिलाया जायेगा,उसके लिए एक हदीस पढ़ लीजिये:

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि मेहमानी 3 दिन तक है और बेहतरीन पकवान 1 दिन और रात तक उसके बाद जो पकाये वो खिलाये और मेहमान के लिए ये हलाल नहीं कि इतने दिनों तक ठहरा रहे कि मेज़बान को परेशान कर डाले|

📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 2,सफह 18

 यानि मेहमान के लिए ये जायज़ नहीं कि 3 दिन से ज़्यादा किसी के घर ठहरे क्योंकि 3 दिन तक वो जो खायेगा उसका हक़ होगा मगर 3 दिन के बाद उसका कोई हक़ नहीं हां अगर मेज़बान खुद 3 दिन के बाद भी मेहमान को रोकता है तो रोक सकता है और अब जो भी खिलायेगा वो सदक़-ए नाफिला में शुमार होगा जिसका उसे अज्रो सवाब मिलेगा|